ePaper Reading mode

Punjab Patrika ePaper

Friday, 17 February 2023

धूमधाम एवं हर्षोल्लास से संपन्न हुआ दुःख निवारण श्री बाला जी धाम का 15वां वार्षिक महोत्सव

धूमधाम एवं हर्षोल्लास से संपन्न हुआ दुःख निवारण श्री बाला जी धाम का 15वां वार्षिक महोत्सव

-- बाला जी महाराज के दर्शनों को उमड़े सैकड़ों श्रद्धालु

-- महामंडलेश्वर स्वामी श्री कमलानंद गिरि जी महाराज ने सुनाई हनुमंत लाल की महिमा

-- श्री सुंदर कांड एवं हनुमान चालीसा पाठ हुए

-- श्री बाला जी महाराज का श्रृंगार बना आकर्षण का केंद्र 

फाजिलका-(दलीप दत्त)-   दुःख निवारण श्री बाला जी धाम फाजिल्का का 15वां वार्षिक महोत्सव शुक्रवार को श्रद्धा-भाव एवं धूमधाम के साथ मनाया गया। श्री कल्याण कमल आश्रम हरिद्वार के अनंत श्री विभूषित 1008 महामंडलेश्वर स्वामी श्री कमलानंद गिरि जी महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित इस भव्य समारोह में पंजाब के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु पहुंचे और वीर बाला जी महाराज के दर्शन कर जीवन सफल बनाया। इस दौरान श्रद्धालु श्री सुंदर कांड एवं श्री हनुमान चालीसा पाठों में शामिल हुए और पाठ करके वीर बजरंग बली की कृपा प्राप्त की। बाला जी महाराज का भव्य श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा। श्री बाला जी फेरी संघ के सेवादारों द्वारा बाला जी महाराज को छप्पन भोग लगाए गए। भक्तों ने बाला जी महाराज को सवामणि भी करवाई। 

प्रवचनों की अमृतवर्षा के दौरान महामंडलेश्वर स्वामी श्री कमलानंद गिरि जी महाराज ने वीर बजरंग बली की महिमा का बखान किया। जबकि उनके साथ पधारे स्वामी श्री सुशांतानंद जी महाराज ने भी सुमधुर भजनों से श्रद्धालुओं को आनंदित किया। महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद जी महाराज ने श्रद्धालुओं को वीर बजरंगी की महिमा सुनाते हुए कहा कि राम भक्त श्री हनुमान जी के नाम, जप, मनन और ध्यान में जप यज्ञ देखने समझने को मिलता है। उनके जीवन का एकमात्र लक्ष्य प्रभु श्री राम जी की सेवा, उनका ध्यान, उनके ही नाम का सिमरन करना था। उनके इस जप ने उनके अहम का सदा के लिए हनन कर उन्हें हनुमान बना दिया। जब श्री राम जी की प्रत्यक्ष सेवा से उन्हें किंचित भी अवकाश मिलता तो उस समय वे सोते, जागते, खाते-पीते, चलते-उठते-बैठते अन्य सभी क्रियाओं के मध्य अपने अंतरतम-ह्दय में राम नाम का जाप करते रहते हैं। जिसके फलस्वरुप उनके रोम छिद्रों से राम-राम की ध्वनि निःसृत होती रहती है और समस्त वातावरण को दूर-दूर तक राममय बना देती है। जप का एक बहुत ही गोपनीय स्वरुप भी है। काशी धाम में भगवान सदा शिव विश्वनाथ रुप से डमरु और श्रृंगि नाद से प्राणकंठ गत जीव को सचेत करते हैं और उससे राम-राम का जाप करवा कर परम धाम में भेज देते हैं। कार्यक्रम के दौरान महाराज जी द्वारा गत दिनों हुई हनुमत कथा, श्री शिवपुराण कथा एवं मूर्ति स्थापना उत्सव को सफल बनाने वाले सहयोगियों को सम्मानित किया गया। इस मौके अध्यक्ष महावीर प्रसाद मोदी, महा सचिव नरेश जुनेजा, कोषाध्यक्ष अश्वनी बांसल, सचिव नरेश अरोड़ा, उत्सव कमेटी अध्यक्ष राकेश धवन, अशोक चुचरा, भारत भूषण गर्ग, किरन चोपड़ा, नरेश सेतिया, विपल दत्ता, दिनेश मोदी, जय लाल, संजय सिंगला सहित बड़ी गिनती में श्रद्धालु मौजूद थे।