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Fazilka News-: 36 दिन बाद खत्म हुआ किसानों का धरना, सहमति के बाद ही बनेगा डिफेंस बांध

करण गिलहोत्रा का भरोसा—फौजी सर्वे रहेगा जारी, बांध की जगह तय करने से पहले ग्रामीणों से होगी चर्चा

Fazilka News-: 36 दिन बाद खत्म हुआ किसानों का धरना, सहमति के बाद ही बनेगा डिफेंस बांध
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फाजिल्का। डिफेंस बांध के मुद्दे पर पिछले 36 दिनों से चल रहा किसानों का धरना समाप्त हो गया। पाँच से अधिक प्रभावित गांवों जिनमें नूरसंबध, लढ़ुका, बैखासता उताड़ और गुलाम रसूल के किसानों के बीच पहुंचे करण गिलहोत्रा ने बातचीत कर धरना समाप्त करने की अपील की। उनके आश्वासन के बाद किसानों ने धरना खत्म करने पर सहमति जताई।

करण गिलहोत्रा ने कहा कि डिफेंस बांध को लेकर फौजी सर्वे जारी रहेगा। सर्वे पूरा होने के बाद प्रस्तावित बांध की जगह की जानकारी सभी ग्रामीणों को दी जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ग्रामीणों से बातचीत और उनकी सहमति के बाद ही बांध बनाने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।

उन्होंने कहा कि किसानों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। यदि उनकी सुनवाई नहीं हुई और समस्याओं का समाधान नहीं निकला, तो उन्हें खुद किसानों के साथ लड़ाई लड़नी पड़ी तो वह लड़ेंगे, पर अभी के लिए हमें अपने आर्मी के ऑफिसर्स पर विश्वास करना चाहिए। 36 दिनों से चल रहे इस आंदोलन का मुख्य मुद्दा पाँच गांवों पर डिफेंस बांध के संभावित प्रभाव को लेकर किसानों की चिंताएं थीं। अब सर्वे और प्रस्तावित स्थल को लेकर होने वाली चर्चा पर सभी की नजरें रहेंगी।

 

इस मौके पर जय चंद, टेक चंद, नत्था राम, रमेश प्रधान, रमेश सरपंच, केवल सरपंच, जगदीश चंद्र एडवोकेट, वेद प्रकाश सरपंच, सुखविंदर सिंह, राज सिंह, परमजीत नूरशाह चेयरमैन, केवल जी राणा से और अन्य किसान व गणमान्य लोग मौजूद रहे।

करण गिलहोत्रा ने कहा कि किसानों की मांग के अनुसार सर्वे की जानकारी पारदर्शी तरीके से उनसे साझा की जाएगी और बांध के निर्माण से जुड़ा कोई भी फैसला प्रभावित गांवों के लोगों की चिंताओं और सहमति को ध्यान में रखकर लिया जाएगा। फिर भी कोई समस्या हुई तो करण गिलहोत्रा खुद किसानों के साथ संघर्ष करेंगे।

पहले भी इस क्षेत्र में जब बांध बनने पर किसानों द्वारा धरना प्रदर्शन किया गया था, तो भी करण गिलहोत्रा ने ही पंजाब के गवर्नर गुलाब चंद कटारिया के दिशा-निर्देश पर फौजी अधिकारियों से बात कर बांध को रद्द करवाया था और बांध ऐसे क्षेत्र में बनाने को कहा था, जिससे दोनों ही पक्षों के हितों की रक्षा हो सके।

गौरतलब है कि इस मामले पर सभी पक्षों के हितों की रक्षा की जाएगी, चाहे देश की सुरक्षा हो या फिर किसान भाइयों के हितों की रक्षा करने की बात हो।