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Fazilka News-:फाजिल्का में एक मरला जमीन पर कब्जे को लेकर हंगामा: 16 साल पहले 10 हजार में खरीदने का दावा; दूसरा पक्ष बोला-2 लाख रुपए दिए

पंचायत सदस्य रिंका के अनुसार पंचायत के पास कुल आठ मरले जमीन थी, जिसमें से सात मरले राजिंदर कुमार को बेच दिए गए थे।

Fazilka News-:फाजिल्का में एक मरला जमीन पर कब्जे को लेकर हंगामा: 16 साल पहले 10 हजार में खरीदने का दावा; दूसरा पक्ष बोला-2 लाख रुपए दिए
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फाजिल्का- फाजिल्का के गांव आजमवाला में महज एक मरला जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है। एक पक्ष ने जमीन पर जबरन कब्जे की कोशिश का आरोप लगाया है, जबकि दूसरे पक्ष का दावा है कि उसने संबंधित जमीन के लिए दो लाख रुपये का भुगतान किया है। विवाद के बीच पंचायत भी सामने आई है और मामले को लेकर प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।

गांव निवासी कुलबीर सिंह का कहना है कि उसने करीब 16 साल पहले गांव के साधु सिंह से एक मरला जमीन 10 हजार रुपये में खरीदी थी। कुलबीर के मुताबिक वह लंबे समय से इस जमीन पर अपना अधिकार जता रहा है। आरोप है कि राजिंदर कुमार अब इस जमीन पर अपना हक जताते हुए उसे वहां रूढ़ी डालने से रोक रहा है। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद पैदा हुआ।

पंचायत सदस्य रिंका के अनुसार पंचायत के पास कुल आठ मरले जमीन थी, जिसमें से सात मरले राजिंदर कुमार को बेच दिए गए थे। उनका दावा है कि एक मरला जमीन कुलबीर सिंह के पास थी। रिंका के मुताबिक राजिंदर ने इस हिस्से को भी खरीदने की बात कही थी, लेकिन बाद में इसे सड़क की जगह बताया जाने लगा। उन्होंने मामले में पूर्व सरपंच गौरव पर लगाए जा रहे आरोपों को भी गलत बताया।

 

वहीं, मौजूदा सरपंच इकबाल सिंह ने मामले में प्रशासन से जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और संबंधित पक्ष को इंसाफ देने की मांग की है।

 फाजिल्का में घटनास्थल पर जुटी भीड़।

 जमीन पर कब्जे के आरोपों को खारिज किया

दूसरी ओर, राजिंदर कुमार ने जमीन पर कब्जे के आरोपों को खारिज किया है। उसका कहना है कि उसने इस जगह के लिए दरबारा सिंह को दो लाख रुपये दिए हैं और भुगतान के उसके पास दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं। राजिंदर के अनुसार खरीदी गई जगह के सामने सड़क भी लगती है।

 दोनों पक्ष जता रहे दावा

फिलहाल दोनों पक्ष जमीन पर अपना-अपना दावा जता रहे हैं। मामले की शिकायत प्रशासन को दिए जाने की तैयारी है। जमीन के दस्तावेजों और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के बाद ही विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।