-दो चुनावों की हार के बाद बदली रणनीति की तैयारी! गुटबाजी के बीच युवा चेहरा तलाश रही भाजपा, राय सिख-अरोड़ा समाज से उम्मीदवार उतारने की चर्चा
फाजिल्का। विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर फाजिल्का की सियासत में अभी से नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भारतीय जनता पार्टी इस बार फाजिल्का विधानसभा सीट से पुराने चेहरे के बजाय नए और युवा चेहरे पर दांव लगाने की रणनीति पर विचार कर सकती है। इसी कड़ी में शिवराज गोयल का नाम भी सियासी चर्चाओं में सामने आ रहा है। हालांकि भाजपा की ओर से अभी तक उम्मीदवार को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
फाजिल्का सीट पर 2017 में कांग्रेस के दविंदर सिंह घुबाया ने भाजपा के सुरजीत कुमार जियाणी को महज 265 वोटों से हराया था। 2022 में जियाणी फिर भाजपा के उम्मीदवार रहे, लेकिन आम आदमी पार्टी के नरिंदर पाल सिंह सवना ने जीत दर्ज की और जियाणी दूसरे स्थान पर रहे।
दो हार के बाद तीसरे चुनाव में चेहरा बदलने की चर्चा
यही चुनावी इतिहास अब भाजपा की आगामी रणनीति को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। लगातार दो विधानसभा चुनावों में फाजिल्का सीट गंवाने के बाद पार्टी के सामने 2027 में उम्मीदवार चयन सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक हो सकता है। ऐसे में राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि क्या भाजपा इस बार नए चेहरे के साथ चुनावी मैदान में उतरकर पुराने समीकरणों को बदलने की कोशिश करेगी।
2022 में भी भाजपा ने फाजिल्का से सुरजीत कुमार जियाणी को ही उम्मीदवार बनाया था। अब 2027 के लिए संभावित नए चेहरे की चर्चा ने स्थानीय भाजपा की राजनीति में नई सरगर्मी पैदा कर दी है।
गुटबाजी बनी तो ‘नया चेहरा’ हो सकता है सबसे बड़ा प्रयोग
फाजिल्का भाजपा के भीतर अलग-अलग राजनीतिक धड़ों की चर्चा लंबे समय से स्थानीय सियासत का हिस्सा रही है। ऐसे में पार्टी के लिए चुनौती केवल उम्मीदवार चुनने की नहीं, बल्कि सभी गुटों को एक मंच पर लाने की भी होगी।
राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक, पुराने चेहरे के साथ यदि अंदरूनी मतभेद दोबारा सामने आते हैं तो पार्टी को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जाती रही है। इसके उलट किसी नए चेहरे को मैदान में उतारकर संगठन के अलग-अलग धड़ों को साथ जोड़ने का प्रयास किया जा सकता है। हालांकि यह फिलहाल राजनीतिक आकलन है, भाजपा की ओर से ऐसी रणनीति की पुष्टि नहीं हुई है।
राय सिख और अरोड़ा समाज के समीकरण पर भी नजर
फाजिल्का की चुनावी राजनीति में सामाजिक समीकरण हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं। 2017 के चुनाव में राय सिख समुदाय के समर्थन को दविंदर सिंह घुबाया की जीत के प्रमुख कारकों में बताया गया था।
इसीलिए 2027 के लिए भाजपा यदि सामाजिक प्रतिनिधित्व और युवा चेहरे को साथ लेकर चलने की रणनीति अपनाती है तो राय सिख अथवा अरोड़ा समाज से आने वाले किसी चेहरे पर भी विचार की चर्चा स्वाभाविक रूप से तेज हो सकती है।
शिवराज गोयल पर लगेगी ‘मोहर’ या सामने आएगा कोई और नाम?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा 2027 में फाजिल्का से किस चेहरे को मैदान में उतारती है। शिवराज गोयल का नाम चर्चा में जरूर है, लेकिन अंतिम फैसला भाजपा नेतृत्व को करना है। यदि पार्टी नए चेहरे के साथ उतरती है तो यह फाजिल्का भाजपा की चुनावी रणनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा।
2027 का चुनाव अभी दूर है, लेकिन फाजिल्का में टिकट को लेकर शुरू हुई यह चर्चा साफ संकेत दे रही है कि इस बार चुनावी मैदान से पहले ही भाजपा के संभावित चेहरे पर सियासी बहस तेज हो चुकी है।