फाजिल्का: बीते दिनों हुई भारी बारिश के कारण फाजिल्का की अनाज मंडी में धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। बारिश के बाद हुए नुकसान की भयावह तस्वीर अब सामने आने लगी है। मंडी में जगह-जगह पानी में खराब हुई धान की फसल बिखरी पड़ी है, जबकि कई किसानों का धान पानी के तेज बहाव में बह गया। फाजिल्का आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष गोल्डी सचदेवा ने प्रशासन को सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर बताया कि मंडी में कई-कई फुट पानी भर जाने से करीब 2500 क्विंटल धान बह गया है। इसके अलावा लगभग 70 हजार धान की बोरियां बारिश के पानी में पूरी तरह भीग चुकी हैं। भीगे हुए धान को अब बोरियों से निकालकर, पंखा लगाकर सुखाया जा रहा है और दोबारा पैकिंग की जा रही है। इस प्रक्रिया में काफी समय, मेहनत और अतिरिक्त खर्च आ रहा है। आढ़तियों ने सवाल उठाया है कि जो धान खरीदा जा चुका था और अब खराब हो गया है, उसकी भरपाई की जिम्मेदारी किसकी होगी।
किसानों को लाखों का नुकसान, फसल पड़ी काली
गांव मुठियावाली के किसान रमेश कुमार ने बताया कि वह 15 एकड़ की फसल लेकर मंडी आए थे। उनकी पूरी खरीदी जा चुकी फसल को बारिश के बाद रद्द कर दिया गया, जिससे उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। गांव दलमीर खेड़ा के किसान सराज सिंह ने बताया कि उनकी 3 एकड़ की फसल भीगने से काली पड़ चुकी है। बार-बार सुखाने के बावजूद धान सही नहीं हो रहा और प्रति एकड़ 5 से 6 क्विंटल धान खराब हो गया है, जिसे कबाड़ के भाव बेचने की नौबत आ गई है। किसानों ने मांग की है कि सुखाने के बाद जो धान बेचने योग्य बचता है, उसे सरकार तुरंत खरीदे और जो फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है, उसका उचित मुआवजा जारी करे।
प्रशासनिक कार्रवाई: 5-सदस्यीय कमेटी गठित
मार्केट कमेटी के सचिव मंदीप कामरा ने बताया कि नुकसान के सटीक आकलन के लिए 5-सदस्यीय कमेटी बनाई गई है, जिसमें आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष, डीएफएससी और संबंधित खरीद एजेंसियों के अधिकारी शामिल हैं। कमेटी पानी में बहे धान, खराब हुए धान और भीगने के बाद सुखाए गए धान तीनों पहलुओं से रिपोर्ट तैयार कर रही है। सत्यापन के बाद यह रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर ही सरकार द्वारा मुआवजे पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।