फाजिल्का, 11 सितंबर। जिले में सेफ स्कूल वाहन पॉलिसी को सख्ती से लागू करने के लिए प्रशासन ने स्कूली वाहनों की जांच तेज कर दी है। डिप्टी कमिश्नर फाजिल्का अमृतप्रीत कौर संधू के निर्देशों पर जिला बाल सुरक्षा कार्यालय और सेफ स्कूल वाहन टीम ने जांच अभियान चलाया। इस दौरान फाजिल्का में 4 तथा अबोहर में 5 स्कूली बसों के चालान किए गए।
जिला बाल सुरक्षा अधिकारी रीतू बाला ने बताया कि सेफ स्कूल वाहन पॉलिसी का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। गंभीर खामियां पाए जाने पर खराब और असुरक्षित बसों को जब्त भी किया जा रहा है।जांच के दौरान वैन और बस चालकों को सेफ स्कूल वाहन पॉलिसी के नियमों की जानकारी दी गई। टीम ने चालकों को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने के लिए कहा और स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
रीतू बाला ने अभिभावकों और स्कूल प्रबंधनों से अपील की कि वे स्कूल बसों में सभी जरूरी सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करें। बसों में खिड़कियों के बाहर ग्रिल, स्पीड गवर्नर, दरवाजों पर सुरक्षित लॉक, फर्स्ट एड बॉक्स और बच्चों के बैग रखने के लिए पर्याप्त स्थान होना जरूरी है।नियमों के तहत बस चालक के पास कम से कम चार वर्ष का ड्राइविंग अनुभव होना चाहिए। बस में आगे और पीछे आपातकालीन दरवाजे, चारों ओर ‘स्कूल बस’ का स्पष्ट उल्लेख और सुनहरी पीला रंग अनिवार्य है। बस पर स्कूल का नाम और संपर्क नंबर भी लिखा होना चाहिए।
स्कूली बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाना और उनकी 60 दिन की फुटेज सुरक्षित रखना भी जरूरी है। किराये पर चलने वाली बसों पर ‘ऑन ड्यूटी’ लिखा होना चाहिए। बसों में क्षमता से अधिक बच्चों को नहीं बैठाया जा सकता। चालक के पास यात्रा करने वाले बच्चों के नाम, पते और कक्षा की सूची होना अनिवार्य है।चालक के लिए हल्के नीले रंग की कमीज-पैंट, काले जूते और नाम की नेम प्लेट जरूरी बताई गई है। साथ ही, बस के फुट स्टेप की ऊंचाई 200 मिलीमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।अधिकारी ने चेतावनी दी कि नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता/लागू प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। चेकिंग अभियान में जिला बाल सुरक्षा कार्यालय की टीम, कोशल बाल सुरक्षा अधिकारी (CPO IC), रणवीर कौर बाल सुरक्षा अधिकारी (CPO NIC), ट्रैफिक पुलिस तथा शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि शामिल रहे।