फाजिल्का: स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से अग्रिम पंक्ति में सेवाएं दे रहे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारियों की मांगों को लेकर सरकार के रवैये पर नाराजगी बढ़ती जा रही है। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार बार-बार बैठकों का आश्वासन देती है, लेकिन बाद में उन्हें स्थगित कर दिया जाता है। इससे एनएचएम कर्मचारियों में भारी रोष है।
एनएचएम यूनियन ने संघर्ष को तेज करने का निर्णय लिया है। यूनियन के अनुसार, 18 सितंबर को मुख्यमंत्री पंजाब के धूरी स्थित कार्यालय का राज्य स्तरीय रोष रैली के बाद घेराव किया जाएगा।
यूनियन नेताओं ने बताया कि 8 सितंबर को पटियाला में पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ राज्य स्तरीय रोष रैली आयोजित की गई थी। इसके बाद यूनियन को कैबिनेट सब-कमेटी और पंजाब के वित्त मंत्री के साथ दो महत्वपूर्ण बैठकों का समय मिला था। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि इन बैठकों के माध्यम से उनकी लंबित मांगों पर कोई ठोस समाधान निकलेगा, लेकिन बैठकों के स्थगित होने से उनका आक्रोश और बढ़ गया।
एनएचएम यूनियन जिला फाजिल्का के प्रधान रविंदर कुमार रतनपाल ने कहा कि सरकार लगातार कर्मचारियों की जायज मांगों को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने कहा कि एनएचएम कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न सेवाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, फिर भी उनकी मांगों को लंबे समय से लंबित रखा जा रहा है।
रतनपाल ने सरकार से यूनियन के साथ तुरंत बातचीत शुरू कर मांगों का सार्थक समाधान करने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में संघर्ष को और व्यापक एवं तेज किया जाएगा।
यूनियन ने सभी एनएचएम कर्मचारियों से 18 सितंबर के राज्य स्तरीय संघर्ष में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।
इस अवसर पर राजेश कुमार, बलजीत संधू, जसपिंदर कौर, सुखदेव रियास्तिया, कृष्ण कंबोज, महेंद्र घोड़ेला और आकाशदीप कंबोज सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।