फाजिल्का। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कांट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन पंजाब 25/11 ने पंजाब सरकार पर कर्मचारियों की मांगों का लंबे समय से समाधान न करने का आरोप लगाया है। यूनियन ने चेतावनी दी कि 17 सितंबर 2026 को प्रस्तावित बैठक में मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ तो 22 सितंबर से पूरे पंजाब में मुकम्मल चक्का जाम शुरू किया जाएगा।
सब डिपो फाजिल्का के प्रधान रविंदर सिंह रिंकू और सूबा नेता उडीक कंबोज ने कहा कि पिछले करीब चार वर्षों में सरकार के साथ लगभग 59 बैठकें हो चुकी हैं। उनके अनुसार, हर बैठक में आश्वासन मिलने पर संघर्ष स्थगित किया गया, लेकिन कर्मचारियों की मुख्य मांगों का समाधान अब तक नहीं हुआ।
ठेकेदारी व्यवस्था और वेतन कटौती पर उठाए सवाल
यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि वे लगातार ठेकेदारी व्यवस्था के तहत कथित अनियमितताओं की जानकारी सरकार को दे रहे हैं। उन्होंने कर्मचारियों के वेतन से जीएसटी के नाम पर कटौती, कमीशन के माध्यम से कथित लूट तथा भर्ती में रिश्वतखोरी के आरोपों का मुद्दा उठाया। यूनियन के मुताबिक, इन मामलों में सबूतों सहित शिकायतें दिए जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई।
नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पहले ठेकेदारी व्यवस्था को समाप्त करने की बात कही थी, लेकिन चार साल बाद भी यह व्यवस्था जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों का ईपीएफ और ईएसआई जमा नहीं कराया जा रहा और इस संबंध में लिखित शिकायतें देने के बावजूद ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलने का आरोप
जनरल सचिव मनप्रीत सिंह, चेयरमैन प्रितपाल सिंह गिल और संरक्षक दलजीत सिंह ने कहा कि कर्मचारी बार-बार के आश्वासनों से निराश हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा, जिससे कम वेतन में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है।
यूनियन नेताओं ने दावा किया कि सरकार की ओर से मुफ्त सफर सुविधा के लगभग 1200 करोड़ रुपये की राशि जारी नहीं की गई है। इसके बावजूद विभाग 17 श्रेणियों को मुफ्त यात्रा सुविधा दे रहा है। उन्होंने कांट्रैक्ट कर्मचारियों को नियमित करने, आउटसोर्स कर्मचारियों को कांट्रैक्ट पर लेने और समान काम के लिए समान वेतन लागू करने की मांग दोहराई।
11 सितंबर को रोष रैलियां, 22 सितंबर से चक्का जाम का ऐलान
यूनियन के अनुसार, 11 सितंबर को पंजाब भर के डिपो में रोष रैलियां की गईं। मीट प्रधान हरभजन सिंह और हरजिंदर सिंह ने कहा कि सरकार की मुफ्त सफर सुविधा का वे स्वागत करते हैं, लेकिन विभाग में नई बसें शामिल नहीं की गईं। उन्होंने किलोमीटर स्कीम की बसों को लेकर भी सवाल उठाए और दावा किया कि विभाग का करीब 90 प्रतिशत काम आउटसोर्स तथा कांट्रैक्ट कर्मचारियों के सहारे चल रहा है।
नेताओं ने किलोमीटर स्कीम की बसों के विरोध के दौरान कर्मचारियों पर दर्ज मामलों को रद्द करने और जेल में बंद साथियों की रिहाई की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि 17 सितंबर की बैठक में मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 22 सितंबर से राज्यव्यापी चक्का जाम किया जाएगा। यूनियन ने कहा कि इस स्थिति की जिम्मेदारी पंजाब सरकार और विभागीय प्रबंधन की होगी।